हम मंदिर में परिक्रमा क्‍यों लगाते हैं जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्‍व

हमारे हिन्दू धर्म में हर किसी कार्य का एक धार्मिक और वैज्ञानिक मतलब होता है यहाँ तक की हम मंदिर में परिक्रमा क्यों लगाते हैं इसका एक भी धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है। हम जब भी किसी मंदिर में जाते हैं तो हम भगवन का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर की परिक्रमा भी लगते हैं। और यह सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि गुरुद्वारों में भी पूजा करने के बाद परिक्रमा लगाई जाती हैं। चाहे वो किसी भी देवी या देवता का मंदिर हो हमारे हिन्दू धर्म में हम मंदिर की परिक्रमा जरूर लगते हैं क्यूंकि माना जाता है कि बिना परिक्रमा के हमारी पूजा पूरी नहीं होती।

लेकिन क्या आपको पता है हम मंदिर में परिक्रमा क्यों लगाते है, और मंदिर में परिक्रमा करने के पीछे कौन सा धार्मिक और वैज्ञानिक कारन हैं

परिवार की सुख शांति
हमारे हिंदू धर्म में मंदिर की परिक्रमा लगाना शुभ माना जाता है। और परिवार की सुख शांति के लिए मंदिर में परिक्रमा लगाई जाती हैं। हमारे हिन्दू धर्म के धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, मंदिरो में और भगवन के आसपास हमेशा सकारात्मक ऊर्जा रहती हैं और जब हम भगवन की परिक्रमा लगते हैं तो यह सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती है। इस ऊर्जा को जब आप घर लेकर जाते हैं तो घर से नकारात्मक ऊर्जा चली जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। जिससे घर में सुख-शांति आती है।

गणेशजी ने लगाए माता-पिता के चक्कर
हमारे हिन्दू धर्म की प्राचीन और पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव – पार्वती के पुत्रो भगवन गणेश और भगवन कार्तिक के बीच यह शर्त लगी की कोण पहले पूरी सृष्टि के चक्कर लगाएगा । तब गणेशजी ने अपने माता पिता यानि शिव और माता पार्वती को पूरी सृष्टि मानकर तीन चक्कर लगाए थे।

जीवन में बनी रहती हैं खुशियां
भगवन गणेश की इस विजय के बाद से ही लोगो के अंदर अपने माता पिता को ही सम्पूर्ण मानकर इनकी परिक्रमा लगाते हैं और इनका आदर करते हैं। और कहा जाता हैं की जहा पर अपने माता पिता को सम्मान दिया जाता हैं उस परिवार में हमेशा माता लक्ष्मी का वास होता है और धन-समृद्धि आती है और जीवन में खुशियां बनी रहती हैं।

मंदिर में परिक्रमा लगाने का वैज्ञानिक कारण
मंदिरो में परिक्रमा लगाने का धार्मिक के अलावा एक वैज्ञानिक कारन भी छुपा हुआ है। वैज्ञानिको के अनुसार जिन जगहों पर हर रोज पूजा होती है, वहां हमेशा एक सकारात्मक ऊर्जा विद्यमान रहती हैं। और मंदिर की परिक्रमा लगाने से ऊर्जा मनुष्य में प्रवेश करती हैं तो उसके मन में शांति आती है और आत्मबल मजबूत होता है।

मंदिर में परिक्रमा किस दिशा में लगाएं ऐसा नहीं की परिक्रमा लगाने का कोई नियम नहीं होता। बल्कि मंदिर में परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। यानि भगवन की दाएं तरफ से परिक्रमा शुरू करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय बात नहीं करनी चाहिए बल्कि मंत्रों का उच्चारण, भगवान का ध्यान करना चाहिए या जयकारे लगाने चाहिए।

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