तिरंगा झंडा से पहले भारत का राष्ट्रीय धवज कौन सा था

अभी तक लोगो को लगता है की आज जो तिरंगा झंडा हैं वही हमारा सबसे पहला झंडा हैं लकिन आपको हैरानी होगी की आज के झंडे से पहले हमारे भारत में और भी झंडे बनाये गए थे। आज का हमारा जो राष्ट्र धवज हैं वो पहला नहीं बल्कि छठा झंडा हैं। हमारा वर्तमान राष्ट्रीय धवज 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था। लकिन इससे पहले हमारे भारत के और भी राष्ट्रीय धवज थे।

यह जानना अत्यंत रोचक है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ से किन-किन परिवर्तनों से गुजरा। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संग्राम के दौरान खोजा गया या मान्यता दी गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों में से गुजरा। एक रूप से यह राष्ट्र में राजनीतिक विकास को दर्शाता है।

भारत का पहला राष्ट्रीय धवज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।

भारत का दूसरा राष्ट्रीय ध्वज पेरिस में 1905 में कुछ भारतीय क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। और इस धवज को राष्ट्रीय धवज की मान्यता दी गई थी। इस धवज में सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था, लेकिन सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

भारत का तीसरा राष्ट्रीय ध्वज 1917 में अस्तित्व में आया था। डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बाईं और ऊपरी किनारे पर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

भारत का चौथा राष्ट्रीय धवज कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान 1921 में बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में फहराया गया था। और यह राष्ट्रीय धवज आंध्र प्रदेश के एक युवक ने बना कर गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है।
इस राष्ट्रीय धवज में गांधी ने सुझाव सुझाव दिया की भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

भारत का पांचवा राष्ट्रीय धवज वर्ष 1931 अपनाया गया। और यह भारत का राष्ट्रीय ध्वज वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। साथ ही यह स्पष्ट रूप से बताया गया इसका कोई सांप्रदायिक महत्व नहीं था।

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मुक्त भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को दिखाया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।

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