आयुर्वेद के अनुसार खाने से जुडी यह गलतिया नहीं करनी चाहिए

हमारे जीवन में आयुर्वेद का बहुत अधिक महत्त्व है और आयुर्वेद में जो भी कहा गया है वो उसके पीछे एक बहुत ही वजह भी होती हैं क्यूंकि आयुर्वेद में हर चीज जो जांचा परखा गया है। पुराने समय में अधिक आयु तक जीने की एक सबसे बड़ी वजह आयुर्वेद थी। आयुर्वेद के अनुसार हमें खाना कहते समय यह 5 गलतिया कभी भी नहीं करनी चाहिए। और इन बातो पर अमल करके हम अपने शरीर को तंदरुस्त रख सकते हैं।

खड़े होकर खाना-पीना
कई बार हम इस भागदौड़ की ज़िन्दगी में खड़े होकर खाना कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब हम खड़े होकर खाते हैं तो हमारे शरीर की डाइजेशन की प्रक्रिया रुक जाती है। और इसलिए खाते वक्त सही पॉश्चर होना बेहद जरूरी है, वही दूसरी ओर खड़े होकर पानी पीने से हमारी टांगो के जोड़ ख़राब हो जाते है जिससे बुढ़ापे में जोड़ो के दर्द की शिकायत रहती है और आयुर्वेद के अनुसार जो खड़ा हो कर पानी पीता है उसके जोड़ो के दर्द कभी भी सही नहीं होते।

हाथ धोना
हमारे आयुर्वेद में हमेशा शारीरिक साफ-सफाई को बहुत ही ज्यादा महत्व दिया गया है। इसलिए खाना खाने से पहले हमेशा हाथो को सही से धोना चाहिए ।

ठंडा पानी
गर्मियों में सभी को ठंडा पानी बहुत अच्छा लगता हैं। लकिन आयुर्वेद के अनुसार हमें बर्फ का ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए क्यूंकि इससे हमारी प्यास तो भुजती नहीं है बल्कि शरीर के तापमान को अचानक झटका मिलता है। इसलिए हमें आयुर्वेद के हिसाब से पानी कमरे के तापमान पर होना चाहिए और धीरे-धीरे पीना चाहिए ताकि शरीर के हर अंग तक पहुंच सके।

खाने का गलत कॉम्बिनेशन लेना
आयुर्वेद में कुछ फूड ऐसे भी हैं जिन्हें एक साथ लेने से बचना चाहिए। इनसे शरीर का वात, पित्त और कफ बैलेंस बिगड़ जाता है। जैसे शहद के साथ घी, खरबूजे या केले के साथ दूध, अंडे के साथ फल वहीं खीरे के साथ नींबू भी नुकसान करता है।

पर्याप्त मात्रा में फैट न लेना
सबको फैट बुरा लगता है लकिन आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर को कुछ फैट्स की भी जरूरत हमेशा होती है। इसलिए हमें हमेशा सही मात्रा में फैट चुनना चाहिए ।

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